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mahabharat 12.339.137-138h: भीष्मजी कहते हैं- युधिष्ठिर! नारदजी द्वारा कही गई यह पूरी कथा मैंने तुमसे कही है। यह पूर्व परम्परा से पहले मेरे पिता को प्राप्त हुई थी। फिर मेरे पिता ने इसे मुझसे कहा। 137 1/2।   |   mahabharat अध्याय 12.339: श्वेतद्वीपमें नारदजीको भगवान् का दर्शन, भगवान् का वासुदेव-संकर्षण आदि अपने व्यूह स्वरूपोंका परिचय कराना और भविष्यमें होनेवाले अवतारोंके कार्योंकी सूचना देना और इस कथाके श्रवण-पठनका माहात्म्य   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 339: श्वेतद्वीपमें नारदजीको भगवान् का दर्शन, भगवान् का वासुदेव-संकर्षण आदि अपने व्यूह स्वरूपोंका परिचय कराना और भविष्यमें होनेवाले अवतारोंके कार्योंकी सूचना देना और इस कथाके श्रवण-पठनका माहात्म्य  »  श्लोक 137-138h
 
 
श्लोक  12.339.137-138h 
भीष्म उवाच
एतत् ते सर्वमाख्यातं नारदोक्तं मयेरितम्॥ १३७॥
पारम्पर्यागतं ह्येतत् पित्रा मे कथितं पुरा।
 
 
अनुवाद
भीष्मजी कहते हैं- युधिष्ठिर! नारदजी द्वारा कही गई यह पूरी कथा मैंने तुमसे कही है। यह पूर्व परम्परा से पहले मेरे पिता को प्राप्त हुई थी। फिर मेरे पिता ने इसे मुझसे कहा। 137 1/2।
 
Bhishmaji says- Yudhishthir! I have told you this whole story told by Naradji. This was received by my father before the previous tradition. Then my father told it to me. 137 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)