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श्री महाभारत
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पर्व 12: शान्ति पर्व
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अध्याय 339: श्वेतद्वीपमें नारदजीको भगवान् का दर्शन, भगवान् का वासुदेव-संकर्षण आदि अपने व्यूह स्वरूपोंका परिचय कराना और भविष्यमें होनेवाले अवतारोंके कार्योंकी सूचना देना और इस कथाके श्रवण-पठनका माहात्म्य
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श्लोक 134-135h
श्लोक
12.339.134-135h
जितं भगवता तेन पुरुषेणेति भारत॥ १३४॥
नित्यं जप्यपरा भूत्वा सरस्वतीमुदीरयन्।
अनुवाद
भरतनन्दन! वे प्रतिदिन भगवान श्रीकृष्ण का नाम जपते थे और 'भगवान पुरुषोत्तम की जय' आदि वचन कहा करते थे। 134 1/2॥
Bharatnandan! He used to chant the name of Lord Krishna daily and used to say words like 'Victory to Lord Purushottam'. 134 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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