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श्री महाभारत
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पर्व 12: शान्ति पर्व
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अध्याय 339: श्वेतद्वीपमें नारदजीको भगवान् का दर्शन, भगवान् का वासुदेव-संकर्षण आदि अपने व्यूह स्वरूपोंका परिचय कराना और भविष्यमें होनेवाले अवतारोंके कार्योंकी सूचना देना और इस कथाके श्रवण-पठनका माहात्म्य
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श्लोक 131-132h
श्लोक
12.339.131-132h
त्वयापि सततं राजन्नभ्यर्च्य: पुरुषोत्तम:॥ १३१॥
स हि माता पिता चैव कृत्स्नस्य जगतो गुरु:।
अनुवाद
राजन! तुम्हें भी सदैव भगवान पुरुषोत्तम का पूजन करना चाहिए; क्योंकि वे सम्पूर्ण जगत के माता, पिता और गुरु हैं। 131 1/2॥
Rajan! You too should always worship Lord Purushottam; Because they are the mother, father and guru of the entire world. 131 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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