श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 339: श्वेतद्वीपमें नारदजीको भगवान् का दर्शन, भगवान् का वासुदेव-संकर्षण आदि अपने व्यूह स्वरूपोंका परिचय कराना और भविष्यमें होनेवाले अवतारोंके कार्योंकी सूचना देना और इस कथाके श्रवण-पठनका माहात्म्य  »  श्लोक 130-131h
 
 
श्लोक  12.339.130-131h 
मुच्येदार्तस्तथा रोगाच्छ्रुत्वेमामादित: कथाम्॥ १३०॥
जिज्ञासुर्लभते कामान् भक्तो भक्तगतिं व्रजेत्।
 
 
अनुवाद
इस कथा को आरम्भ से सुनने से रोगी व्यक्ति रोगमुक्त हो जायेगा, जिज्ञासु व्यक्ति को इच्छित ज्ञान की प्राप्ति होगी तथा भक्त को भक्त के योग्य गति प्राप्त होगी।
 
By listening to this story from the beginning, a sick person will be cured of his illness, an inquisitive person will gain the knowledge he desires and a devotee will attain the state befitting a devotee.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)