Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.339.128-130h: जो मनुष्य प्रतिदिन इसका पाठ करेगा और जो सदैव इसका श्रवण करेगा, वह भगवान् के प्रति अनन्य भाव प्राप्त करके श्वेत नामक महाद्वीप को प्राप्त होगा और अनन्य मन से उनके अनन्य भक्तों में समर्पित हो जाएगा तथा वह मनुष्य चन्द्रमा के समान तेजस्वी रूप धारण करके उन सहस्र किरणों वाले भगवान् नारायणदेव में प्रवेश करेगा, इसमें कोई संदेह नहीं है।।128-129 1/2॥ | mahabharat अध्याय 12.339: श्वेतद्वीपमें नारदजीको भगवान् का दर्शन, भगवान् का वासुदेव-संकर्षण आदि अपने व्यूह स्वरूपोंका परिचय कराना और भविष्यमें होनेवाले अवतारोंके कार्योंकी सूचना देना और इस कथाके श्रवण-पठनका माहात्म्य । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जो मनुष्य प्रतिदिन इसका पाठ करेगा और जो सदैव इसका श्रवण करेगा, वह भगवान् के प्रति अनन्य भाव प्राप्त करके श्वेत नामक महाद्वीप को प्राप्त होगा और अनन्य मन से उनके अनन्य भक्तों में समर्पित हो जाएगा तथा वह मनुष्य चन्द्रमा के समान तेजस्वी रूप धारण करके उन सहस्र किरणों वाले भगवान् नारायणदेव में प्रवेश करेगा, इसमें कोई संदेह नहीं है।।128-129 1/2॥
The person who will recite it every day and who will always listen to it, after attaining the exclusive feeling towards God, he will reach the continent called Shweta and will be devoted to His dedicated devotees with a single mind and that person will assume a form as radiant as the moon and will enter Lord Narayanadev of those thousands of rays, there is no doubt about it. 128-129 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥