श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 339: श्वेतद्वीपमें नारदजीको भगवान् का दर्शन, भगवान् का वासुदेव-संकर्षण आदि अपने व्यूह स्वरूपोंका परिचय कराना और भविष्यमें होनेवाले अवतारोंके कार्योंकी सूचना देना और इस कथाके श्रवण-पठनका माहात्म्य  »  श्लोक 126-127h
 
 
श्लोक  12.339.126-127h 
मत्तोऽन्यानि च ते राजन्नुपाख्यानशतानि वै॥ १२६॥
यानि श्रुतानि सर्वाणि तेषां सारोऽयमुद्‍धृत:।
 
 
अनुवाद
महाराज! आपने मुझसे जो सैकड़ों किस्से सुने हैं, उनका सार आपके सामने प्रस्तुत कर दिया गया है।
 
King! The gist of all the hundreds of anecdotes you have heard from me has been extracted and presented before you. 126 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)