Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.339.124-125h: भरतनन्दन! पिता के मुख से यह प्रसंग सुनकर अब मैंने तुम्हें सुनाया है। देवता, ऋषि या जितने भी लोगों ने इस प्राचीन ज्ञान को सुना है, वे सभी सर्वत्र परमात्मा की पूजा करते हैं। | mahabharat अध्याय 12.339: श्वेतद्वीपमें नारदजीको भगवान् का दर्शन, भगवान् का वासुदेव-संकर्षण आदि अपने व्यूह स्वरूपोंका परिचय कराना और भविष्यमें होनेवाले अवतारोंके कार्योंकी सूचना देना और इस कथाके श्रवण-पठनका माहात्म्य । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ततो मयापि श्रुत्वा च कीर्तितं तव भारत।
सुरैर्वा मुनिभिर्वापि पुराणं यैरिदं श्रुतम्॥ १२४॥
सर्वे ते परमात्मानं पूजयन्ते समन्तत:।
अनुवाद
भरतनन्दन! पिता के मुख से यह प्रसंग सुनकर अब मैंने तुम्हें सुनाया है। देवता, ऋषि या जितने भी लोगों ने इस प्राचीन ज्ञान को सुना है, वे सभी सर्वत्र परमात्मा की पूजा करते हैं।
Bharatanandan! Having heard this episode from father's mouth, I have now narrated it to you. Gods, sages or all those who have heard this ancient knowledge, they all worship the Supreme Being everywhere. 124 1/2.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥