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श्री महाभारत
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पर्व 12: शान्ति पर्व
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अध्याय 339: श्वेतद्वीपमें नारदजीको भगवान् का दर्शन, भगवान् का वासुदेव-संकर्षण आदि अपने व्यूह स्वरूपोंका परिचय कराना और भविष्यमें होनेवाले अवतारोंके कार्योंकी सूचना देना और इस कथाके श्रवण-पठनका माहात्म्य
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श्लोक 122-123h
श्लोक
12.339.122-123h
देवानां तु सकाशाद् वै तत: श्रुत्वासितो द्विज:॥ १२२॥
श्रावयामास राजेन्द्र पितॄणां मुनिसत्तम:।
अनुवाद
राजेन्द्र! श्रेष्ठ ब्राह्मण असित ने देवताओं के मुख से वह माहात्म्य सुना और पितरों को सुनाया ॥122 1/2॥
Rajendra! Asit, the best Brahmin, heard that greatness from the mouth of the gods and narrated it to the ancestors. 122 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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