श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 339: श्वेतद्वीपमें नारदजीको भगवान् का दर्शन, भगवान् का वासुदेव-संकर्षण आदि अपने व्यूह स्वरूपोंका परिचय कराना और भविष्यमें होनेवाले अवतारोंके कार्योंकी सूचना देना और इस कथाके श्रवण-पठनका माहात्म्य  »  श्लोक 115-116
 
 
श्लोक  12.339.115-116 
भीष्म उवाच
महाकल्पसहस्राणि महाकल्पशतानि च॥ ११५॥
समतीतानि राजेन्द्र सर्गाश्च प्रलयाश्च ह।
सर्गस्यादौ स्मृतो ब्रह्मा प्रजासर्गकर: प्रभु:॥ ११६॥
 
 
अनुवाद
भीष्म बोले, "राजेन्द्र! अब तक सैकड़ों-हजारों महाकल्प बीत चुके हैं, अनेक सृष्टियाँ और प्रलय समाप्त हो चुके हैं। सृष्टि के आदि में भगवान ब्रह्मा को ही मनुष्य जाति का रचयिता माना गया है।" 115-116.
 
Bhishma said, "Rajendra! Hundreds and thousands of Mahakalpas have passed by now, many creations and destructions have ended. In the beginning of creation, Lord Brahma is considered to be the creator of the human race. 115-116.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)