श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 339: श्वेतद्वीपमें नारदजीको भगवान् का दर्शन, भगवान् का वासुदेव-संकर्षण आदि अपने व्यूह स्वरूपोंका परिचय कराना और भविष्यमें होनेवाले अवतारोंके कार्योंकी सूचना देना और इस कथाके श्रवण-पठनका माहात्म्य  »  श्लोक 114-115h
 
 
श्लोक  12.339.114-115h 
पितामहोऽपि भगवांस्तस्माद् देवादनन्तर:॥ ११४॥
कथं स न विजानीयात् प्रभावममितौजस:।
 
 
अनुवाद
भगवान ब्रह्मा उन्हीं नारायण से प्रकट हुए हैं, फिर वे उन महाबली नारायण की शक्ति को कैसे न जान सकते हैं?॥114 1/2॥
 
Lord Brahma has appeared from the same Narayana. Then how can he not know the power of that mighty Narayana?॥ 114 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)