vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 12: शान्ति पर्व
»
अध्याय 339: श्वेतद्वीपमें नारदजीको भगवान् का दर्शन, भगवान् का वासुदेव-संकर्षण आदि अपने व्यूह स्वरूपोंका परिचय कराना और भविष्यमें होनेवाले अवतारोंके कार्योंकी सूचना देना और इस कथाके श्रवण-पठनका माहात्म्य
»
श्लोक 114-115h
श्लोक
12.339.114-115h
पितामहोऽपि भगवांस्तस्माद् देवादनन्तर:॥ ११४॥
कथं स न विजानीयात् प्रभावममितौजस:।
अनुवाद
भगवान ब्रह्मा उन्हीं नारायण से प्रकट हुए हैं, फिर वे उन महाबली नारायण की शक्ति को कैसे न जान सकते हैं?॥114 1/2॥
Lord Brahma has appeared from the same Narayana. Then how can he not know the power of that mighty Narayana?॥ 114 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×