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mahabharat 12.339.110-111h: तत्पश्चात् महाबली नारद भगवान् का अभीष्ट वरदान प्राप्त करके नर-नारायण के दर्शन हेतु बदरिकाश्रम की ओर चल पड़े।   |   mahabharat अध्याय 12.339: श्वेतद्वीपमें नारदजीको भगवान् का दर्शन, भगवान् का वासुदेव-संकर्षण आदि अपने व्यूह स्वरूपोंका परिचय कराना और भविष्यमें होनेवाले अवतारोंके कार्योंकी सूचना देना और इस कथाके श्रवण-पठनका माहात्म्य   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 339: श्वेतद्वीपमें नारदजीको भगवान् का दर्शन, भगवान् का वासुदेव-संकर्षण आदि अपने व्यूह स्वरूपोंका परिचय कराना और भविष्यमें होनेवाले अवतारोंके कार्योंकी सूचना देना और इस कथाके श्रवण-पठनका माहात्म्य  »  श्लोक 110-111h
 
 
श्लोक  12.339.110-111h 
नारदोऽपि महातेजा: प्राप्यानुग्रहमीप्सितम्॥ ११०॥
नरनारायणौ द्रष्टुं बदर्याश्रममाद्रवत्।
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् महाबली नारद भगवान् का अभीष्ट वरदान प्राप्त करके नर-नारायण के दर्शन हेतु बदरिकाश्रम की ओर चल पड़े।
 
Then the mighty Narada, after receiving the desired blessing of the Lord, proceeded towards Badarikashrama to have the darshan of Nara-Narayana. 110 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)