श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 339: श्वेतद्वीपमें नारदजीको भगवान् का दर्शन, भगवान् का वासुदेव-संकर्षण आदि अपने व्यूह स्वरूपोंका परिचय कराना और भविष्यमें होनेवाले अवतारोंके कार्योंकी सूचना देना और इस कथाके श्रवण-पठनका माहात्म्य  »  श्लोक 108-109h
 
 
श्लोक  12.339.108-109h 
एतत् ते सर्वमाख्यातं ब्रह्मन् भक्तिमतो मया॥ १०८॥
पुराणं च भविष्यं च सरहस्यं च सत्तम।
 
 
अनुवाद
ब्रह्मन्! साधुप्रवर! आप मेरे प्रति भक्ति रखने वाले हैं, इसीलिए मैंने आपको पूर्व और भविष्य के समस्त अवतारों का रहस्यसहित वर्णन किया है। 108 1/2॥
 
Brahman! Sadhupravar! You are the one who has devotion towards me, that is why I have described all the past and future incarnations to you along with their secrets. 108 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)