Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.339.107-108h: वे अवतार लोक कल्याण का कार्य पूर्ण करके पुनः अपने मूल स्वरूप में विलीन हो गए हैं। मुझ पर आपकी अनन्य भक्ति के कारण ही आज आपने यहाँ जो रूप देखा है, वह आज तक ब्रह्मा ने भी नहीं देखा है॥107 1/2॥ | mahabharat अध्याय 12.339: श्वेतद्वीपमें नारदजीको भगवान् का दर्शन, भगवान् का वासुदेव-संकर्षण आदि अपने व्यूह स्वरूपोंका परिचय कराना और भविष्यमें होनेवाले अवतारोंके कार्योंकी सूचना देना और इस कथाके श्रवण-पठनका माहात्म्य । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
लोककार्याणि कृत्वा च पुन: स्वां प्रकृतिं गता:।
न ह्येतद् ब्रह्मणा प्राप्तमीदृशं मम दर्शनम्॥ १०७॥
यत् त्वया प्राप्तमद्येह एकान्तगतबुद्धिना।
अनुवाद
वे अवतार लोक कल्याण का कार्य पूर्ण करके पुनः अपने मूल स्वरूप में विलीन हो गए हैं। मुझ पर आपकी अनन्य भक्ति के कारण ही आज आपने यहाँ जो रूप देखा है, वह आज तक ब्रह्मा ने भी नहीं देखा है॥107 1/2॥
Those incarnations, after completing the work of public welfare, have again merged with their original forms. Due to your exclusive devotion towards me, the form which you have seen here today, has not been seen by even Brahma till date.॥ 107 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥