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mahabharat 12.339.106: अब तक हुए मेरे अवतारों का वर्णन तो तुमने पुराणों में सुना ही होगा। मेरे अनेक उत्तम अवतार पहले भी हो चुके हैं॥106॥   |   mahabharat अध्याय 12.339: श्वेतद्वीपमें नारदजीको भगवान् का दर्शन, भगवान् का वासुदेव-संकर्षण आदि अपने व्यूह स्वरूपोंका परिचय कराना और भविष्यमें होनेवाले अवतारोंके कार्योंकी सूचना देना और इस कथाके श्रवण-पठनका माहात्म्य   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 339: श्वेतद्वीपमें नारदजीको भगवान् का दर्शन, भगवान् का वासुदेव-संकर्षण आदि अपने व्यूह स्वरूपोंका परिचय कराना और भविष्यमें होनेवाले अवतारोंके कार्योंकी सूचना देना और इस कथाके श्रवण-पठनका माहात्म्य  »  श्लोक 106
 
 
श्लोक  12.339.106 
अतिक्रान्ता: पुराणेषु श्रुतास्ते यदि वा क्वचित्।
अतिक्रान्ताश्च बहव: प्रादुर्भावा ममोत्तमा:॥ १०६॥
 
 
अनुवाद
अब तक हुए मेरे अवतारों का वर्णन तो तुमने पुराणों में सुना ही होगा। मेरे अनेक उत्तम अवतार पहले भी हो चुके हैं॥106॥
 
You may have heard about the incarnations of mine which have taken place till now in the Puranas. Many of my best incarnations have already taken place.॥ 106॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)