श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 339: श्वेतद्वीपमें नारदजीको भगवान् का दर्शन, भगवान् का वासुदेव-संकर्षण आदि अपने व्यूह स्वरूपोंका परिचय कराना और भविष्यमें होनेवाले अवतारोंके कार्योंकी सूचना देना और इस कथाके श्रवण-पठनका माहात्म्य  »  श्लोक 105
 
 
श्लोक  12.339.105 
यदा वेदश्रुतिर्नष्टा मया प्रत्याहृता पुन:।
सवेदा: सश्रुतीकाश्च कृता: पूर्वं कृते युगे॥ १०५॥
 
 
अनुवाद
जब-जब वेद ​​और श्रुतियाँ लुप्त हुई हैं, तब-तब मैंने अवतार लेकर उन्हें पुनः प्रकाशित किया है। मैंने प्रथम सत्ययुग में वेदों के साथ श्रुतियों को भी प्रकट किया था।
 
Whenever the Vedas and Shrutis have disappeared, I have taken incarnation and brought them back to light. I had revealed the Shrutis along with the Vedas in the first Satya Yuga. 105.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)