श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 339: श्वेतद्वीपमें नारदजीको भगवान् का दर्शन, भगवान् का वासुदेव-संकर्षण आदि अपने व्यूह स्वरूपोंका परिचय कराना और भविष्यमें होनेवाले अवतारोंके कार्योंकी सूचना देना और इस कथाके श्रवण-पठनका माहात्म्य  »  श्लोक 102-103h
 
 
श्लोक  12.339.102-103h 
कर्माण्यपरिमेयाणि चतुर्मूर्तिधरो ह्यहम्॥ १०२॥
कृत्वा लोकान् गमिष्यामि स्वानहं ब्रह्मसत्कृतान्।
 
 
अनुवाद
मैं श्रीकृष्ण, बलभद्र, प्रद्युम्न और अनिरुद्ध इन चार रूपों को धारण करके असंख्य कर्म करूंगा और भगवान ब्रह्मा द्वारा सम्मानित अपने धाम को जाऊंगा।
 
Having assumed the four forms of Shri Krishna, Balabhadra, Pradyumna and Aniruddha, I will perform innumerable deeds and go to my abode honored by Lord Brahma.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)