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mahabharat 12.339.101-102h: हे महामुनि! मैं पृथ्वीदेवी का भार उनकी इच्छानुसार उतारकर द्वारका के समस्त यादव सरदारों का विनाश करूँगा और फिर अपने ही कुल के विनाश जैसा जघन्य अपराध करूँगा। ॥101 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 12.339: श्वेतद्वीपमें नारदजीको भगवान् का दर्शन, भगवान् का वासुदेव-संकर्षण आदि अपने व्यूह स्वरूपोंका परिचय कराना और भविष्यमें होनेवाले अवतारोंके कार्योंकी सूचना देना और इस कथाके श्रवण-पठनका माहात्म्य   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 339: श्वेतद्वीपमें नारदजीको भगवान् का दर्शन, भगवान् का वासुदेव-संकर्षण आदि अपने व्यूह स्वरूपोंका परिचय कराना और भविष्यमें होनेवाले अवतारोंके कार्योंकी सूचना देना और इस कथाके श्रवण-पठनका माहात्म्य  »  श्लोक 101-102h
 
 
श्लोक  12.339.101-102h 
कृत्वा भारावतरणं वसुधाया यथेप्सितम्।
सर्वसात्वतमुख्यानां द्वारकायाश्च सत्तम॥ १०१॥
करिष्ये प्रलयं घोरमात्मज्ञातिविनाशनम्।
 
 
अनुवाद
हे महामुनि! मैं पृथ्वीदेवी का भार उनकी इच्छानुसार उतारकर द्वारका के समस्त यादव सरदारों का विनाश करूँगा और फिर अपने ही कुल के विनाश जैसा जघन्य अपराध करूँगा। ॥101 1/2॥
 
O great saint! After taking down the burden of the Earth Goddess as per her wish, I will destroy all the Yadav chiefs of Dwaraka and then commit a heinous crime like destruction of my own race. ॥101 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)