Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.337.39: हे कुन्तीपुत्र! इस प्रकार देवताओं की आज्ञा के विरुद्ध वाचिक अपराध करने के कारण ब्राह्मणों के शाप से उस महामनस्वी राजा को भी अधोगति को प्राप्त होना पड़ा।।39।। | mahabharat अध्याय 12.337: यज्ञमें आहुतिके लिये अजका अर्थ अन्न है, बकरा नहीं—इस बातको जानते हुए भी पक्षपात करनेके कारण राजा उपरिचरके अध:पतनकी और भगवत्कृपासे उनके पुनरुत्थानकी कथा । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
एवं तेनापि कौन्तेय वाग्दोषाद् देवताज्ञया।
प्राप्ता गतिरधस्तात् तु द्विजशापान्महात्मना॥ ३९॥
अनुवाद
हे कुन्तीपुत्र! इस प्रकार देवताओं की आज्ञा के विरुद्ध वाचिक अपराध करने के कारण ब्राह्मणों के शाप से उस महामनस्वी राजा को भी अधोगति को प्राप्त होना पड़ा।।39।।
O son of Kunti! In this way, that great-minded king also had to go down due to the curse of the Brahmins for committing a verbal crime against the orders of the gods. 39.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥