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mahabharat 12.337.37: अचानक विनतारनन्द गरुड़ ने राजा को वहां से उठा लिया और तुरन्त आकाश में उड़ाकर वहीं छोड़ दिया।   |   mahabharat अध्याय 12.337: यज्ञमें आहुतिके लिये अजका अर्थ अन्न है, बकरा नहीं—इस बातको जानते हुए भी पक्षपात करनेके कारण राजा उपरिचरके अध:पतनकी और भगवत्कृपासे उनके पुनरुत्थानकी कथा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 337: यज्ञमें आहुतिके लिये अजका अर्थ अन्न है, बकरा नहीं—इस बातको जानते हुए भी पक्षपात करनेके कारण राजा उपरिचरके अध:पतनकी और भगवत्कृपासे उनके पुनरुत्थानकी कथा  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  12.337.37 
तत एनं समुत्क्षिप्य सहसा विनतासुत:।
उत्पपात नभस्तूर्णं तत्र चैनममुञ्चत॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
अचानक विनतारनन्द गरुड़ ने राजा को वहां से उठा लिया और तुरन्त आकाश में उड़ाकर वहीं छोड़ दिया।
 
Suddenly, Vinatarananda Garuda lifted the King up from there and immediately flew him into the sky and left him there.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)