Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.337.31: उसने अपने मन पर विजय प्राप्त कर ली थी और सदैव भगवान की भक्ति में लगा रहता था। भगवान श्री नारायण हरि अपने अनन्य भक्त की भक्ति से अत्यंत प्रसन्न थे॥31॥ | mahabharat अध्याय 12.337: यज्ञमें आहुतिके लिये अजका अर्थ अन्न है, बकरा नहीं—इस बातको जानते हुए भी पक्षपात करनेके कारण राजा उपरिचरके अध:पतनकी और भगवत्कृपासे उनके पुनरुत्थानकी कथा । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ततोऽस्य तुष्टो भगवान् भक्त्या नारायणो हरि:।
अनन्यभक्तस्य सतस्तत्परस्य जितात्मन:॥ ३१॥
अनुवाद
उसने अपने मन पर विजय प्राप्त कर ली थी और सदैव भगवान की भक्ति में लगा रहता था। भगवान श्री नारायण हरि अपने अनन्य भक्त की भक्ति से अत्यंत प्रसन्न थे॥31॥
He had conquered his mind and was always engaged in the worship of God. Lord Shri Narayan Hari was very pleased with the devotion of his exclusive devotee. ॥ 31॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥