Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.337.22-23: हे राजन! आपको श्रेष्ठ ब्राह्मणों का सदैव आदर करना चाहिए। यह निश्चय ही उनकी तपस्या का फल है, जिसके कारण आप अचानक आकाश से गिरकर पाताल लोक में आ गए हैं। | mahabharat अध्याय 12.337: यज्ञमें आहुतिके लिये अजका अर्थ अन्न है, बकरा नहीं—इस बातको जानते हुए भी पक्षपात करनेके कारण राजा उपरिचरके अध:पतनकी और भगवत्कृपासे उनके पुनरुत्थानकी कथा । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हे राजन! आपको श्रेष्ठ ब्राह्मणों का सदैव आदर करना चाहिए। यह निश्चय ही उनकी तपस्या का फल है, जिसके कारण आप अचानक आकाश से गिरकर पाताल लोक में आ गए हैं।
'O great king! You should always respect the great Brahmins. This is surely the result of their penance; due to which you have suddenly fallen from the sky and have come to the netherworld. 22-23.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥