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mahabharat 12.337.20-21h: "हे देवताओं! हम सब लोग मिलकर उन्हें अत्यंत प्रसन्न करें।" अपनी बुद्धि से ऐसा निश्चय करके सभी देवता राजा उपरिचर वसु के पास गए और प्रसन्नतापूर्वक बोले - ॥20 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 12.337: यज्ञमें आहुतिके लिये अजका अर्थ अन्न है, बकरा नहीं—इस बातको जानते हुए भी पक्षपात करनेके कारण राजा उपरिचरके अध:पतनकी और भगवत्कृपासे उनके पुनरुत्थानकी कथा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 337: यज्ञमें आहुतिके लिये अजका अर्थ अन्न है, बकरा नहीं—इस बातको जानते हुए भी पक्षपात करनेके कारण राजा उपरिचरके अध:पतनकी और भगवत्कृपासे उनके पुनरुत्थानकी कथा  »  श्लोक 20-21h
 
 
श्लोक  12.337.20-21h 
अस्य प्रतिप्रियं कार्यं सहितैर्नो दिवौकस:।
इति बुद्‍ध्या व्यवस्याशु गत्वा निश्चयमीश्वरा:॥ २०॥
ऊचु: संहृष्टमनसो राजोपरिचरं तदा।
 
 
अनुवाद
"हे देवताओं! हम सब लोग मिलकर उन्हें अत्यंत प्रसन्न करें।" अपनी बुद्धि से ऐसा निश्चय करके सभी देवता राजा उपरिचर वसु के पास गए और प्रसन्नतापूर्वक बोले - ॥20 1/2॥
 
"O Gods! We must all come together and please him immensely." Having made this decision with their intellect, all the Gods went to King Uparichara Vasu and said happily - ॥20 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)