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श्री महाभारत
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पर्व 12: शान्ति पर्व
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अध्याय 336: राजा उपरिचरके यज्ञमें भगवान्पर बृहस्पतिका क्रोधित होना, एकत आदि मुनियोंका बृहस्पतिसे श्वेतद्वीप एवं भगवान् की महिमाका वर्णन करके उनको शान्त करना
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श्लोक 5
श्लोक
12.336.5
तस्य यज्ञो महानासीदश्वमेधो महात्मन:।
बृहस्पतिरुपाध्यायस्तत्र होता बभूव ह॥ ५॥
अनुवाद
एक बार उन महात्मा नरेश ने महान अश्वमेध यज्ञ का आयोजन किया, जिसमें बृहस्पति उनके अधिपति थे ॥5॥
Once that Mahatma Naresh organized the great Ashwamedha Yagya. In that, Jupiter was his ruler. 5॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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