श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 335: नारदजीका श्वेतद्वीपदर्शन, वहाँके निवासियोंके स्वरूपका वर्णन, राजा उपरिचरका चरित्र तथा पाञ्चरात्रकी उत्पत्तिका प्रसङ्ग  »  श्लोक d1
 
 
श्लोक  12.335.d1 
(शान्तनो: कथयामास नारदो मुनिसत्तम:।
राज्ञा पृष्ट: पुरा प्राह तत्राहं श्रुतवान् पुरा॥ )
 
 
अनुवाद
पूर्वकाल में जब मेरे पिता महाराज शांतनु ने इस विषय में पूछा था, तब महर्षि नारद ने उन्हें यह कथा सुनाई थी। मैंने भी उस समय वहाँ इसे सुना था।
 
In the past, when my father Maharaj Shantanu asked about this, the great sage Narada had told him this story. I too had heard it there at that time.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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