vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 12: शान्ति पर्व
»
अध्याय 335: नारदजीका श्वेतद्वीपदर्शन, वहाँके निवासियोंके स्वरूपका वर्णन, राजा उपरिचरका चरित्र तथा पाञ्चरात्रकी उत्पत्तिका प्रसङ्ग
»
श्लोक 52
श्लोक
12.335.52
एतावदुक्त्वा वचनमदृश्य: पुरुषोत्तम:।
विसृज्य तानृषीन् सर्वान् कामपि प्रसृतो दिशम्॥ ५२॥
अनुवाद
ऐसे अदृश्य रूप से वचन कहकर भगवान् पुरुषोत्तम समस्त ऋषियों को वहीं छोड़कर किसी अज्ञात दिशा की ओर चले गए ॥52॥
Having said such words in an invisible manner, Lord Purushottama left all the sages there and proceeded towards some unknown direction. ॥ 52॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×