श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 335: नारदजीका श्वेतद्वीपदर्शन, वहाँके निवासियोंके स्वरूपका वर्णन, राजा उपरिचरका चरित्र तथा पाञ्चरात्रकी उत्पत्तिका प्रसङ्ग  »  श्लोक 51
 
 
श्लोक  12.335.51 
संस्थिते तु नृपे तस्मिन् शास्त्रमेतत् सनातनम्।
अन्तर्धास्यति तत् सर्वमेतद् व: कथितं मया॥ ५१॥
 
 
अनुवाद
‘उस राजा के मर जाने पर यह सनातन शास्त्र सर्वसाधारण की दृष्टि से लुप्त हो जाएगा। इससे संबंधित सब बातें मैंने तुम्हें बता दी हैं।’॥51॥
 
‘After the death of that king, this Sanatan Shastra will disappear from the sight of the general public. I have told you all the things related to it.'॥ 51॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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