vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 12: शान्ति पर्व
»
अध्याय 335: नारदजीका श्वेतद्वीपदर्शन, वहाँके निवासियोंके स्वरूपका वर्णन, राजा उपरिचरका चरित्र तथा पाञ्चरात्रकी उत्पत्तिका प्रसङ्ग
»
श्लोक 48
श्लोक
12.335.48
स हि सद्भावितो राजा मद्भक्तश्च भविष्यति।
तेन शास्त्रेण लोकेषु क्रिया: सर्वा: करिष्यति॥ ४८॥
अनुवाद
‘वह राजा पुण्यात्माओं द्वारा सम्मानित होकर मेरा परम भक्त होगा और संसार में समस्त कर्म शास्त्रविधि के अनुसार करेगा॥ 48॥
‘That king, respected by the virtuous, will be my greatest devotee and will perform all the actions in the world according to those scriptures.॥ 48॥
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas