श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 335: नारदजीका श्वेतद्वीपदर्शन, वहाँके निवासियोंके स्वरूपका वर्णन, राजा उपरिचरका चरित्र तथा पाञ्चरात्रकी उत्पत्तिका प्रसङ्ग  »  श्लोक 44-45
 
 
श्लोक  12.335.44-45 
तस्मात् प्रवक्ष्यते धर्मान् मनु: स्वायम्भुव: स्वयम्॥ ४४॥
उशना बृहस्पतिश्चैव यदोत्पन्नौ भविष्यत:।
तदा प्रवक्ष्यत: शास्त्रं युष्मन्मतिभिरुद्‍धृतम्॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
स्वयंभुव मनु स्वयं इस ग्रन्थ के अनुसार धर्म का उपदेश करेंगे। जब शुक्राचार्य और बृहस्पति प्रकट होंगे, तब वे भी आपकी बुद्धि से उत्पन्न इस शास्त्र का उपदेश करेंगे।' 44-45
 
‘Svayambhuva Manu himself will preach the Dharma according to this Granth. When Shukracharya and Brihaspati appear, they too will preach this Shastra derived from your intellect. 44-45.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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