vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 12: शान्ति पर्व
»
अध्याय 335: नारदजीका श्वेतद्वीपदर्शन, वहाँके निवासियोंके स्वरूपका वर्णन, राजा उपरिचरका चरित्र तथा पाञ्चरात्रकी उत्पत्तिका प्रसङ्ग
»
श्लोक 40
श्लोक
12.335.40
प्रवृत्तौ च निवृत्तौ च यस्मादेतद् भविष्यति।
यजुर्ऋक्सामभिर्जुष्टमथर्वांगिरसैस्तथा॥ ४०॥
अनुवाद
प्रवृत्ति और निवृत्ति के विषय में यह ऋक्, यजुः, साम और अथर्ववेद के मन्त्रों से अनुमोदित ग्रन्थ के समान प्रामाणिक होगा ॥40॥
'On the subject of tendency and withdrawal, this will be as authentic as the book approved by the mantras of Rik, Yajuh, Sama and Atharva Veda. 40॥
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas