श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 335: नारदजीका श्वेतद्वीपदर्शन, वहाँके निवासियोंके स्वरूपका वर्णन, राजा उपरिचरका चरित्र तथा पाञ्चरात्रकी उत्पत्तिका प्रसङ्ग  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  12.335.36 
तत: प्रवर्तिता सम्यक् तपोविद्भिर्द्विजातिभि:।
शब्दे चार्थे च हेतौ च एषा प्रथमसर्गजा॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
फिर उन तपस्वी ब्राह्मणों ने शब्द, अर्थ और उद्देश्य से युक्त वाणी का प्रयोग किया। यही उनकी प्रथम रचना थी। 36.
 
Then those ascetic Brahmins used speech containing words, meaning and purpose. This was their first creation. 36.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)