vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 12: शान्ति पर्व
»
अध्याय 335: नारदजीका श्वेतद्वीपदर्शन, वहाँके निवासियोंके स्वरूपका वर्णन, राजा उपरिचरका चरित्र तथा पाञ्चरात्रकी उत्पत्तिका प्रसङ्ग
»
श्लोक 33
श्लोक
12.335.33
तत्र धर्मार्थकामा हि मोक्ष: पश्चाच्च कीर्तित:।
मर्यादा विविधाश्चैव दिवि भूमौ च संस्थिता:॥ ३३॥
अनुवाद
इसमें पहले धर्म, अर्थ और काम का, फिर मोक्ष का वर्णन है। इसमें स्वर्ग और मृत्युलोक में प्रचलित विविध रीतियों का भी वर्णन है ॥33॥
It first describes Dharma, Artha and Kama and then Moksha. It also describes the various customs prevalent in heaven and the mortal world. ॥ 33॥
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas