श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 335: नारदजीका श्वेतद्वीपदर्शन, वहाँके निवासियोंके स्वरूपका वर्णन, राजा उपरिचरका चरित्र तथा पाञ्चरात्रकी उत्पत्तिका प्रसङ्ग  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  12.335.13 
युधिष्ठिर उवाच
अनिन्द्रिया निराहारा अनिष्पन्दा: सुगन्धिन:।
कथं ते पुरुषा जाता: का तेषां गतिरुत्तमा॥ १३॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर ने पूछा - पितामह ! श्वेतद्वीप में रहने वाले मनुष्य इन्द्रिय, आहार और गति से रहित क्यों हैं ? उनके शरीर से सुन्दर गंध क्यों निकलती है ? उनकी उत्पत्ति किस प्रकार हुई है और वे किस उत्तम गति को प्राप्त होते हैं ? 13॥
 
Yudhishthir asked – Grandfather! Why are the men living in Shwetdweep devoid of senses, food and movements? Why does their body emit a beautiful smell? How did they originate and what is the best speed they attain? 13॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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