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श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 334: बदरिकाश्रममें नारदजीके पूछनेपर भगवान् नारायणका परमदेव परमात्माको ही सर्वश्रेष्ठ पूजनीय बताना  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  12.334.44 
ये तु तद्भाविता लोके ह्येकान्तित्वं समास्थिता:।
एतदभ्यधिकं तेषां यत् ते तं प्रविशन्त्युत॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
जो लोग सदैव उनका स्मरण करते हैं और अनन्य भक्ति से उनकी शरण में आते हैं, उनके लिए सबसे बड़ा लाभ यह है कि वे उनके स्वरूप में प्रवेश कर जाते हैं ॥ 44॥
 
The greatest benefit to those who always remember Him and surrender to Him with exclusive devotion is that they enter into His Form. ॥ 44॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)