Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.334.40: जो पाँच ज्ञानेन्द्रियाँ, पाँच कर्मेन्द्रियाँ, पाँच प्राण, मन और बुद्धिरूपी सत्रह गुणों से रहित हैं तथा सब कर्मों से मुक्त हैं और जिन्होंने पंद्रह कलाओं का त्याग कर दिया है, वे ही मुक्त हैं, ऐसा शास्त्रों का सिद्धान्त है ॥40॥ | mahabharat अध्याय 12.334: बदरिकाश्रममें नारदजीके पूछनेपर भगवान् नारायणका परमदेव परमात्माको ही सर्वश्रेष्ठ पूजनीय बताना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ये हीना: सप्तदशभिर्गुणै: कर्मभिरेव च।
कला: पञ्चदश त्यक्ता ते मुक्ता इति निश्चय:॥ ४०॥
अनुवाद
जो पाँच ज्ञानेन्द्रियाँ, पाँच कर्मेन्द्रियाँ, पाँच प्राण, मन और बुद्धिरूपी सत्रह गुणों से रहित हैं तथा सब कर्मों से मुक्त हैं और जिन्होंने पंद्रह कलाओं का त्याग कर दिया है, वे ही मुक्त हैं, ऐसा शास्त्रों का सिद्धान्त है ॥40॥
Only those who are free from the five sense organs, five action organs, five vital organs, mind and seventeen qualities in the form of intellect and are free from all actions and have renounced the fifteen arts, only they are free, this is the principle of the scriptures. 40॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥