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श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 334: बदरिकाश्रममें नारदजीके पूछनेपर भगवान् नारायणका परमदेव परमात्माको ही सर्वश्रेष्ठ पूजनीय बताना  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  12.334.33 
नास्ति तस्मात् परोऽन्यो हि पिता देवोऽथवा द्विज।
आत्मा हि न: स विज्ञेयस्ततस्तं पूजयावहे॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
ब्रह्म! उनसे बड़ा कोई देवता या पूर्वज नहीं है। वे हमारी आत्मा हैं, यह जानना चाहिए। इसलिए हम उनकी पूजा करते हैं।
 
Brahman! There is no other god or ancestor greater than Him. He is our soul, this should be known. Therefore we worship Him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)