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mahabharat 12.334.26-27h: हे प्रभु! भूत, वर्तमान और भविष्य का सम्पूर्ण जगत आपमें ही स्थित है। गृहस्थ से लेकर चारों आश्रमों के सभी लोग प्रतिदिन विविध रूपों में आपकी पूजा करते हैं॥ 26 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 12.334: बदरिकाश्रममें नारदजीके पूछनेपर भगवान् नारायणका परमदेव परमात्माको ही सर्वश्रेष्ठ पूजनीय बताना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 334: बदरिकाश्रममें नारदजीके पूछनेपर भगवान् नारायणका परमदेव परमात्माको ही सर्वश्रेष्ठ पूजनीय बताना  »  श्लोक 26-27h
 
 
श्लोक  12.334.26-27h 
प्रतिष्ठितं भूतभव्यं त्वयि सर्वमिदं जगत‍्।
चत्वारो ह्याश्रमा देव सर्वे गार्हस्थ्यमूलका:॥ २६॥
यजन्ते त्वामहरहर्नानामूर्तिसमास्थितम्।
 
 
अनुवाद
हे प्रभु! भूत, वर्तमान और भविष्य का सम्पूर्ण जगत आपमें ही स्थित है। गृहस्थ से लेकर चारों आश्रमों के सभी लोग प्रतिदिन विविध रूपों में आपकी पूजा करते हैं॥ 26 1/2॥
 
O Lord! The entire universe of the past, present and future is established in you. All the people of the four ashramas (hermitages) starting from the household worship you daily in various forms.॥ 26 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)