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श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 334: बदरिकाश्रममें नारदजीके पूछनेपर भगवान् नारायणका परमदेव परमात्माको ही सर्वश्रेष्ठ पूजनीय बताना  »  श्लोक 18-19h
 
 
श्लोक  12.334.18-19h 
अत्र कृष्णो हरिश्चैव कस्मिंश्चित् कारणान्तरे॥ १८॥
स्थितौ धर्मोत्तरौ ह्येतौ तथा तपसि धिष्ठितौ।
 
 
अनुवाद
इनमें हरि और कृष्ण तो अन्य कार्यों में लगे हुए हैं; परंतु ये दोनों भाई नारायण और मानव धर्म को ही प्रधान मानकर तपस्या में लगे हुए हैं॥18 1/2॥
 
‘Among these, Hari and Krishna are engaged in some other work; but these two brothers are engaged in austerities, considering Narayana and human religion as the most important.॥ 18 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)