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mahabharat 12.334.15-16h: जब भगवान नर और नारायण की नित्य लीलाओं का समय हुआ, तो नारदजी उन्हें देखने के लिए बहुत उत्सुक हो गए। वे सोचने लगे, 'अहा! यह तो उन्हीं भगवान का स्थान है, जिनमें देवता, दानव, गंधर्व, किन्नर और महासर्प आदि समस्त जगत निवास करते हैं।'   |   mahabharat अध्याय 12.334: बदरिकाश्रममें नारदजीके पूछनेपर भगवान् नारायणका परमदेव परमात्माको ही सर्वश्रेष्ठ पूजनीय बताना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 334: बदरिकाश्रममें नारदजीके पूछनेपर भगवान् नारायणका परमदेव परमात्माको ही सर्वश्रेष्ठ पूजनीय बताना  »  श्लोक 15-16h
 
 
श्लोक  12.334.15-16h 
तयोराह्निकवेलायां तस्य कौतूहलं त्वभूत्।
इदं तदास्पदं कृत्स्नं यस्मिँल्लोका: प्रतिष्ठिता:॥ १५॥
सदेवासुरगन्धर्वा: सकिन्नरमहोरगा:।
 
 
अनुवाद
जब भगवान नर और नारायण की नित्य लीलाओं का समय हुआ, तो नारदजी उन्हें देखने के लिए बहुत उत्सुक हो गए। वे सोचने लगे, 'अहा! यह तो उन्हीं भगवान का स्थान है, जिनमें देवता, दानव, गंधर्व, किन्नर और महासर्प आदि समस्त जगत निवास करते हैं।'
 
When it was time for the daily activities of Lord Nara and Narayana, Naradji became very eager to see them. He started thinking, 'Oh! This is the place of the same Lord in whom the entire world resides including the gods, demons, Gandharvas, Kinnars and great serpents.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)