vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 12: शान्ति पर्व
»
अध्याय 333: शुकदेवजीकी परमपद-प्राप्ति तथा पुत्र-शोकसे व्याकुल व्यासजीको महादेवजीका आश्वासन देना
»
श्लोक 41
श्लोक
12.333.41
एतदाचष्ट मे राजन् देवर्षिर्नारद: पुरा।
व्यासश्चैव महायोगी संजल्पेषु पदे पदे॥ ४१॥
अनुवाद
राजन! देवर्षि नारदजी ने सबसे पहले मुझे यह कथा सुनाई थी। महायोगी व्यासजी भी अपनी बातचीत में पग-पग पर इस कथा को दोहराते हैं ॥ 41॥
King! Devarshi Naradji was the first one to tell me this story. Even the great yogi Vyasji repeats this story at every step of his conversation. ॥ 41॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×