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mahabharat 12.333.18-19h: यह जानकर कि वह सिद्धि प्राप्ति के लिए यह उत्तरक्रम कर रहा है, उसके पिता वेदव्यास भी स्नेहवश उत्तम गति का आश्रय लेकर उसके पीछे चलने लगे।   |   mahabharat अध्याय 12.333: शुकदेवजीकी परमपद-प्राप्ति तथा पुत्र-शोकसे व्याकुल व्यासजीको महादेवजीका आश्वासन देना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 333: शुकदेवजीकी परमपद-प्राप्ति तथा पुत्र-शोकसे व्याकुल व्यासजीको महादेवजीका आश्वासन देना  »  श्लोक 18-19h
 
 
श्लोक  12.333.18-19h 
तं प्रक्रामन्तमाज्ञाय पिता स्नेहसमन्वित:॥ १८॥
उत्तमां गतिमास्थाय पृष्ठतोऽनुससार ह।
 
 
अनुवाद
यह जानकर कि वह सिद्धि प्राप्ति के लिए यह उत्तरक्रम कर रहा है, उसके पिता वेदव्यास भी स्नेहवश उत्तम गति का आश्रय लेकर उसके पीछे चलने लगे।
 
Knowing that he was doing this Uttrakrama for attaining Siddhi, his father Veda-Vyas too, out of affection, took shelter of the Uttam Gati and started following him. 18 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)