श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 332: शुकदेवजीकी ऊर्ध्वगतिका वर्णन  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  12.332.11 
तमुद्यन्तं द्विजश्रेष्ठं वैनतेयसमद्युतिम्।
ददृशु: सर्वभूतानि मनोमारुतरंहसम्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
उस समय समस्त प्राणियों ने उन दोनों में श्रेष्ठ, विनतानन्द गरुड़ के समान तेजस्वी तथा मन और वायु के समान वेगवान शुकदेव को ऊपर जाते देखा॥11॥
 
At that time, all the living beings saw Shukdev, the best of the two, as bright as Vintanand Garuda and as swift as mind and wind, going up. 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)