Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.331.9: यदि जीव के कर्मों का फल दूसरों पर आश्रित न होता, तो जो कुछ चाहता, उसे उसकी रुचि के अनुसार इच्छित वस्तु मिल जाती ॥9॥ | mahabharat अध्याय 12.331: नारदजीका शुकदेवको कर्मफल-प्राप्तिमें परतन्त्रताविषयक उपदेश तथा शुकदेवजीका सूर्यलोकमें जानेका निश्चय । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
योऽयमिच्छेद् यथाकामं कामानां तदवाप्नुयात्।
यदि स्यान्न पराधीनं पुरुषस्य क्रियाफलम्॥ ९॥
अनुवाद
यदि जीव के कर्मों का फल दूसरों पर आश्रित न होता, तो जो कुछ चाहता, उसे उसकी रुचि के अनुसार इच्छित वस्तु मिल जाती ॥9॥
If the results of the actions of a living being were not dependent on others, then whoever desired something would get what he desired according to his interest. ॥9॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥