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mahabharat 12.331.58: मैं इस शरीर को सूर्यलोक में छोड़कर ऋषियों के साथ सूर्यदेव के अत्यंत असह्य तेज में प्रवेश करूंगा।   |   mahabharat अध्याय 12.331: नारदजीका शुकदेवको कर्मफल-प्राप्तिमें परतन्त्रताविषयक उपदेश तथा शुकदेवजीका सूर्यलोकमें जानेका निश्चय   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 331: नारदजीका शुकदेवको कर्मफल-प्राप्तिमें परतन्त्रताविषयक उपदेश तथा शुकदेवजीका सूर्यलोकमें जानेका निश्चय  »  श्लोक 58
 
 
श्लोक  12.331.58 
सूर्यस्य सदने चाहं निक्षिप्येदं कलेवरम्।
ऋषिभि: सह यास्यामि सौरं तेजोऽतिदु:सहम्॥ ५८॥
 
 
अनुवाद
मैं इस शरीर को सूर्यलोक में छोड़कर ऋषियों के साथ सूर्यदेव के अत्यंत असह्य तेज में प्रवेश करूंगा।
 
Leaving this body in the Sun world, I will enter the extremely unbearable radiance of the Sun God along with the sages.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)