Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.331.57: अतः मुझे तेजस्वी आदित्यमण्डल में जाना ही श्रेयस्कर प्रतीत होता है। मैं वहाँ निर्भय होकर निवास करूँगा। मुझे परास्त करना किसी के लिए भी कठिन होगा ॥57॥ | mahabharat अध्याय 12.331: नारदजीका शुकदेवको कर्मफल-प्राप्तिमें परतन्त्रताविषयक उपदेश तथा शुकदेवजीका सूर्यलोकमें जानेका निश्चय । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अतो मे रोचते गन्तुमादित्यं दीप्ततेजसम्।
अत्र वत्स्यामि दुर्धर्षो नि:शङ्केनान्तरात्मना॥ ५७॥
अनुवाद
अतः मुझे तेजस्वी आदित्यमण्डल में जाना ही श्रेयस्कर प्रतीत होता है। मैं वहाँ निर्भय होकर निवास करूँगा। मुझे परास्त करना किसी के लिए भी कठिन होगा ॥57॥
Therefore, it seems best to me to go to the blazing bright Adityamandal. I will reside there without any fear. It will be difficult for anyone to defeat me. ॥ 57॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥