Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.331.50: मैं उस परम गति को प्राप्त करना चाहता हूँ जहाँ आत्मा पुनः प्रकट नहीं होती। मैंने मन के द्वारा सब प्रकार की आसक्तियों का त्याग करके उस परम गति को प्राप्त करने का निश्चय किया है ॥50॥ | mahabharat अध्याय 12.331: नारदजीका शुकदेवको कर्मफल-प्राप्तिमें परतन्त्रताविषयक उपदेश तथा शुकदेवजीका सूर्यलोकमें जानेका निश्चय । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मैं उस परम गति को प्राप्त करना चाहता हूँ जहाँ आत्मा पुनः प्रकट नहीं होती। मैंने मन के द्वारा सब प्रकार की आसक्तियों का त्याग करके उस परम गति को प्राप्त करने का निश्चय किया है ॥50॥
I want to achieve that ultimate state where the soul does not re-appear. I have decided to achieve the highest state by giving up all kinds of attachments through the mind. ॥ 50॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥