Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.331.49: तब वह सोचने लगा कि मैं सब प्रकार की उपाधियों से मुक्त होकर किस प्रकार उस परमपद को प्राप्त करूँ जहाँ से मुझे फिर इस संसार में लौटकर न आना पड़े ॥49॥ | mahabharat अध्याय 12.331: नारदजीका शुकदेवको कर्मफल-प्राप्तिमें परतन्त्रताविषयक उपदेश तथा शुकदेवजीका सूर्यलोकमें जानेका निश्चय । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कथं त्वहमसंश्लिष्टो गच्छेयं गतिमुत्तमाम्।
नावर्तेयं यथा भूयो योनिसंकरसागरे॥ ४९॥
अनुवाद
तब वह सोचने लगा कि मैं सब प्रकार की उपाधियों से मुक्त होकर किस प्रकार उस परमपद को प्राप्त करूँ जहाँ से मुझे फिर इस संसार में लौटकर न आना पड़े ॥49॥
Then he began to think, how can I, being free from all kinds of titles, achieve that supreme state from where I would not have to come back to this world again. ॥ 49॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥