तत्पश्चात् उन्होंने दो क्षण तक अपने भाग्य पर विचार किया; तब भूत और भविष्यत् के ज्ञाता शुकदेवजी को अपने धर्म का परम कल्याण निश्चित हो गया ॥48॥
Thereafter he pondered over his destiny for two moments; then Shukdev, who was the knower of the past and the future, became certain of the ultimate welfare of his religion. ॥ 48॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥