Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.331.48: तत्पश्चात् उन्होंने दो क्षण तक अपने भाग्य पर विचार किया; तब भूत और भविष्यत् के ज्ञाता शुकदेवजी को अपने धर्म का परम कल्याण निश्चित हो गया ॥48॥ | mahabharat अध्याय 12.331: नारदजीका शुकदेवको कर्मफल-प्राप्तिमें परतन्त्रताविषयक उपदेश तथा शुकदेवजीका सूर्यलोकमें जानेका निश्चय । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तत्पश्चात् उन्होंने दो क्षण तक अपने भाग्य पर विचार किया; तब भूत और भविष्यत् के ज्ञाता शुकदेवजी को अपने धर्म का परम कल्याण निश्चित हो गया ॥48॥
Thereafter he pondered over his destiny for two moments; then Shukdev, who was the knower of the past and the future, became certain of the ultimate welfare of his religion. ॥ 48॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥