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mahabharat 12.331.47: वह सोचने लगा कि पत्नी और बच्चों के झंझट में पड़ने से बड़ा दुःख होगा। पढ़ाई-लिखाई में भी बहुत मेहनत लगती है। परमानन्द प्राप्ति का उपाय क्या है? उस मार्ग पर थोड़ा दुःख होगा, परन्तु बड़ा कल्याण होगा।   |   mahabharat अध्याय 12.331: नारदजीका शुकदेवको कर्मफल-प्राप्तिमें परतन्त्रताविषयक उपदेश तथा शुकदेवजीका सूर्यलोकमें जानेका निश्चय   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 331: नारदजीका शुकदेवको कर्मफल-प्राप्तिमें परतन्त्रताविषयक उपदेश तथा शुकदेवजीका सूर्यलोकमें जानेका निश्चय  »  श्लोक 47
 
 
श्लोक  12.331.47 
पुत्रदारैर्महान् क्लेशो विद्याम्नाये महान् श्रम:।
किं नु स्याच्छाश्वतं स्थानमल्पक्लेशं महोदयम्॥ ४७॥
 
 
अनुवाद
वह सोचने लगा कि पत्नी और बच्चों के झंझट में पड़ने से बड़ा दुःख होगा। पढ़ाई-लिखाई में भी बहुत मेहनत लगती है। परमानन्द प्राप्ति का उपाय क्या है? उस मार्ग पर थोड़ा दुःख होगा, परन्तु बड़ा कल्याण होगा।
 
He started thinking that getting into the troubles of his wife and children will cause great pain. Studying also requires a lot of hard work. What is the way to attain the eternal position? In that way, there will be little pain but great prosperity.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)