vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 12: शान्ति पर्व
»
अध्याय 331: नारदजीका शुकदेवको कर्मफल-प्राप्तिमें परतन्त्रताविषयक उपदेश तथा शुकदेवजीका सूर्यलोकमें जानेका निश्चय
»
श्लोक 45
श्लोक
12.331.45
एतत् ते परमं गुह्यमाख्यातमृषिसत्तम।
येन देवा: परित्यज्य मर्त्यलोकं दिवं गता:॥ ४५॥
अनुवाद
हे महामुनि! मैंने आपसे यह अत्यन्त गम्भीर बात कही है, जिसके कारण देवतागण मृत्युलोक छोड़कर स्वर्गलोक को चले गए हैं॥45॥
O great sage! I have told you this extremely profound matter, due to which the gods left the mortal world and went to heaven. ॥ 45॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×