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mahabharat 12.331.39: यहाँ तक कि वीर योद्धा भी बिना किसी लापरवाही के धन और मदिरा के नशे में चूर दुष्ट लोगों की सेवा करते हैं।   |   mahabharat अध्याय 12.331: नारदजीका शुकदेवको कर्मफल-प्राप्तिमें परतन्त्रताविषयक उपदेश तथा शुकदेवजीका सूर्यलोकमें जानेका निश्चय   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 331: नारदजीका शुकदेवको कर्मफल-प्राप्तिमें परतन्त्रताविषयक उपदेश तथा शुकदेवजीका सूर्यलोकमें जानेका निश्चय  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  12.331.39 
ऐश्वर्यमदमत्तांश्च मत्तान् मद्यमदेन च।
अप्रमत्ता: शठान् शूरा विक्रान्ता: पर्युपासते॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
यहाँ तक कि वीर योद्धा भी बिना किसी लापरवाही के धन और मदिरा के नशे में चूर दुष्ट लोगों की सेवा करते हैं।
 
Even valiant warriors without any negligence serve wicked men who are intoxicated with wealth and wine.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)